Paper Title गांधी जी का सर्वोदय एवं समकालीन परिवेश
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Country India
Abstract तुम्हें एक जंतर देता हूँ। जब भी तुम्हें सन्देह हो या तुम्हारा अहम तुम पर हावी होने लगे तो यह कसौटी अपनाओं, जो सबसे गरीब और कमजोर आदमी तुमने देखा हो उसकी शक्ल याद करो और अपने दिल से पूछो कि जो कदम उठाने का तुम विचार कर रहे हो वह उस आदमी के लिए कितना उपयोगी होगा? क्या उससे उसे कुछ लाभ पहुँचेगा? क्या उससे वह अपने ही जीवन व भाग्य पर कुछ काबू रख सकेगा? यानि क्या उससे उन करोड़ों लोगों को स्वराज मिल सकेगा जिनके पेट भूखे है और आत्मा अतृप्त है? अब तुम देखोगे कि तुम्हारा संदेह मिट रहा है और अहम समाप्त होता जा रहा है।’’ प्रत्येक व्यक्ति को यह मन्त्र हमेशा याद रखना चाहिए कि वह जो काम कर रहा है उससे हाशिये पर खड़े गांधी के ‘आखिरी आदमी’ के आँखों से आँसू पोंछ रहा है या नहीं?
Keywords सर्वोदय, समाज, उन्नति, मूल्यों, अहिंसा
Subject Area Sociology
Issue JSECR,V.12, N.27 October-December 2026
Published 2026/10/29
DOI https://doi.org/10.68868/14Js15aK33
How to Cite Rekha, R. (2026). गांधी जी का सर्वोदय एवं समकालीन परिवेश. Journal of Socio-Educational & Cultural Research, 12(27).
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